चाहते तो लाठी ये भी चला सकते थे। लेकिन आफ़त सब पर है और इसकी संवेदनशीलता ये समझते हैं। तभी बाहर निकलने वालों को गाना सुना एहसास करा रहे हैं। यही पुलिसिंग के संस्कार का फ़र्क़ है।
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) March 27, 2020
"ज़िंदगी मौत न बन जाए संभालों यारों, मुश्किल में है वतन बचा लो यारों”@MumbaiPolice के लिए 👏🤗 pic.twitter.com/Qc7ODE8wLL